इस दिन जितने तिलों का दान करते है उतने हजार वर्ष मिलता है स्वर्ग

सर्दियों में तिल दान का विशेष महत्व रहता है। पौराणिक ग्रंथों में तिल दान की महत्ता दिन विशेष के हिसाब से भी प्रतिपादित की गई है। माघ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को तिल दान विशेष महत्व है। इस एकादशी पर व्रत का पालन करते हुए जितने तिल दान किए जाते है उतने हजार वर्ष स्वर्ग मिलता है। यही वजह है कि इसे तिलकूटा या षट्तिला एकादशी कहा जाता है। 

इस दिन छह प्रकार से तिल दान (Tila Daan) का विधान है— 


1. तिल मिश्रित जल से स्नान 
2. तिल का उबटन 
3. तिल का तिलक 
4. तिल मिश्रित जल का सेवन 
5. तिल का भोजन 
6. तिल से हवन। 

षट्तिला एकादशी के व्रत की कथा (Shat Tila Ekadashi Vrat Katha)


तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए एक दिन नारद जी वैकुण्ठ धाम पहुंचे। उन्होंने भगवान विष्णु को प्रणाम किया और प्रभु से षट्तिला एकादशी के महत्व और कथा के बारे में पूछा। इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें इस व्रत के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में पृथ्वीलोक पर एक ब्राह्मणी रहती थी। वह ब्राह्मणी मुझमें बहुत श्रद्धा रखती थी और मेरे निमित्त सभी व्रत रखती थी। एक बार ब्राह्मणी ने पूरे एक महीने तक व्रत रखा और पूरे मनोयोग से मेरी आराधना की। 
व्रत के प्रभाव से ब्राह्मणी का शरीर शुद्ध हो गया। परंतु वह कभी ब्राह्मण एवं देवताओं के निमित्त अन्न दान नहीं करती थी इसलिए मैंने सोचा कि ब्राह्मणी व्रत के प्रभाव से वैकुण्ड में तो आ जाएगी लेकिन, दान नहीं किए जाने से अतृप्त रहेगी। इसलिए मैं स्वयं एक दिन भिक्षा लेने पहुंच गया। ब्राह्मणी से मैंने भिक्षा की याचना की तो उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर मेरे हाथों पर रख दिया। मैं वह पिण्ड लेकर लौट आया। कुछ दिनों बाद उस ब्राह्मणी ने देह त्याग दी और वैकुण्ठ लोक में आ गई। कर्मों के हिसाब से उसे एक कुटिया और आम का पेड़ मिला। खाली कुटिया को देखकर उसने मुझसे इसका कारण पूछा। तब मैंने उसे बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने से हुआ है।
मैंने फिर उसे बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तब आप अपना द्वार तभी खोलना जब वे आपको षट्तिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं। उसने ऐसा ही किया और देवकन्या के बताए अनुसार ब्रह्मणी ने षट्तिला एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया अन्न और धन से भर गई। इसलिए हे नारद! जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है और तिल एवं अन्न दान करता है उसे मुक्ति और वैभव की प्राप्ति होती है।

कैसे करें षट्तिला एकादशी का व्रत (Shat Tila Ekadashi )


माघ का महीना पवित्र और पावन होता है। इस माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षट्तिला कहते हैं। षट्तिला एकादशी के दिन मनुष्य को भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखना चाहिए। व्रत करने वालों को गंध, पुष्प, धूप दीप, ताम्बूल सहित विष्णु भगवान की षोड्षोपचार से पूजन करना चाहिए। उड़द और तिल मिश्रित खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाना चाहिए। रात्रि के समय तिल से ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय स्वाहा इस मंत्र से हवन करना चाहिए।

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